डिजिटल - जशपुर
जिला प्रशासन की डिजिटल पहल — योजनाओं, परियोजनाओं एवं सेवाओं की वास्तविक समय में निगरानी व पारदर्शी जानकारी एक ही मंच पर।
निर्माण जशपुर पोर्टल जिला प्रशासन की एक अनोखी पहल है, जिसका उद्देश्य जिले का डिजिटलीकरण और सशक्तिकरण करना है। यह पोर्टल जिले की जनसंख्या को जोड़कर, योजना निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करता है और उन्हें वास्तविक समय में डेटा तक पहुंच प्रदान करता है। साथ ही, यह पोर्टल निम्न सुविधाएं प्रदान करता है:
यह पोर्टल डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने, प्रक्रियाओं को तकनीक के माध्यम से डिजिटल करने, पारदर्शिता बढ़ाने और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में मदद करता है।
छत्तीसगढ़ के उत्तर-पूर्वी छोर पर, झारखंड एवं ओडिशा राज्यों की सीमा से लगा यह पहाड़ी एवं वनाच्छादित जिला 25 मई 1998 को रायगढ़ जिले से अलग होकर अस्तित्व में आया। शीतल जलवायु, चाय बागान, मनोरम जलप्रपातों एवं समृद्ध जनजातीय संस्कृति के लिए यह जिला अपनी विशिष्ट पहचान रखता है।
शीतल जलवायु, सघन वनों, चाय बागान एवं समृद्ध जनजातीय संस्कृति का अनूठा जिला
जशपुर जिला छत्तीसगढ़ के उत्तर-पूर्वी छोर पर, छोटानागपुर पठार के दक्षिणी भाग में बसा एक पहाड़ी एवं वनाच्छादित जिला है, जो 25 मई 1998 को रायगढ़ जिले से अलग होकर अस्तित्व में आया। झारखंड एवं ओडिशा राज्यों की सीमा से लगा यह जिला अपनी शीतल जलवायु, सघन वनों एवं बड़ी जनजातीय आबादी के लिए जाना जाता है। जिला मुख्यालय जशपुरनगर के निकट स्थित सन्ना गांव में छत्तीसगढ़ का एकमात्र चाय बागान 'कनक टी एस्टेट' स्थित है। इसके अलावा कैलाश गुफा, रानी दाह व दुमरपानी जलप्रपात एवं कुनकुरी का प्रसिद्ध गिरजाघर जिले के प्रमुख पर्यटन आकर्षण हैं।